कीरग्राम के दो अभिलेख

Authors

  • राजीव त्रिगर्ती Author

Keywords:

कीरग्राम, लक्ष्मणचन्द्र, जयचन्द्र, त्रिगर्त, मन्युक, आहुक, नवग्राम, प्रलम्ब, जालन्धर, सुशर्मपुर, राजानक

Abstract

इतिहास की परतों को खोलने का सबसे जीवित साधन अभिलेख ही होते हैं। हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक महत्त्व का स्थल मन्दिर है। इस मन्दिर की दक्षिणी और उत्तरी दीवारों पर प्रस्तर शिलाओं पर दो अभिलेख उत्कीर्ण हैं। दोनों अभिलेखों का सम्बन्ध मन्दिर निर्माण से है तथा इन दोनों में मन्दिर को दिये गये भूमि तथा आर्थिक सहयोग का विवरण प्रस्तुत किया गया है। अध्येताओं के मतों के उपरान्त इन दोनों अभिलेखों का काल ग्यारहवीं शताब्दी का प्रारम्भिक काल स्वीकार किया गया है। अभिलेखों के विवरणों के आधार पर इनका काल ही मन्दिर निर्माण का काल भी सिद्ध होता है। अभिलेखीय विवरणों में इस स्थान का नाम ‘कीरग्राम’ उल्लिखित है जिससे इस क्षेत्र में कीर जाति का आधिपत्य स्पष्ट प्रमाणित होता है। मन्दिर निर्माण काल के समय यह क्षेत्र त्रिगर्त सत्ता के अधीन था और मन्दिर निर्माण भी जालन्धर अथवा त्रिगर्त के अधिपति द्वारा ही संरक्षित था।

Downloads

Published

2024-12-31

Issue

Section

शोधपत्र

How to Cite

त्रिगर्ती राजीव. 2024. “कीरग्राम के दो अभिलेख”. Pratnakīrti 5 (2). https://ojs.sangamjournals.org/index.php/Pratnakirti/article/view/2.

Similar Articles

You may also start an advanced similarity search for this article.