रघुवंश के दुर्घट प्रयोग
Keywords:
कालिदास, रघुवंशम्, दुर्घट प्रयोग, भट्टोजिदीक्षितAbstract
रचना-प्रक्रिया में कवियों द्वारा ‘असामान्य’ शब्दों या क्रियाओं का प्रयोग कभी तो रचना की अपनी मांग होती है, कभी तत्परक शास्त्र में कौशल-प्रदर्शन सम्बन्धी रचनाकार की स्वेच्छा। माघ, भारवि, भट्टि आदि के पूर्व ऐसे प्रयोग ‘रचना की मांग’ के स्तर पर देखे जाने के बावजूद साामान्य पाठकों के लिए ‘व्युत्पत्ति’ और ‘सिद्धि’ की अपेक्षा रखते हैं। युगीन वैयाकरण इन्हें व्युत्पन्न और सिद्ध करते आए हैं। इस आलेख के लेखक ने ‘रघुवंश’ के कुछेक उदाहरणों को चिह्नित कर उनकी व्युत्पत्ति और सिद्धि द्वारा ‘काव्यपाठ’ में पाठकीय सावधानी की ओर संकेत किया है।
References
रघुवंशम्
अष्टाध्यायी
किरातार्जुनीयम्
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