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संस्कृत-पत्रिकाओं में प्रकाशित एकाङ्की रूपकों का अवलोकन एवं उनकी सूची

Authors

  • अमर दयाल Author
  • लालाशङ्कर गयावाल Author

Keywords:

रूपक, एकाङ्की रूपक, उपरूपक, संस्कृत पत्रकारिता

Abstract

ईसा पूर्व 500 के आसपास रङ्गमञ्च नाट्यकृतियाँ और नाट्य सूत्रों का प्रणयन होने लगा था, इसी समय से ही रङ्गमञ्च और अभिनय से सम्बन्धित अनेक पारिभाषिक शब्दों का प्रचलन प्राप्त होता है। आचार्य भरत की रचना के बाद नाट्य, रङ्गमञ्च और नाट्यकृतियों का समग्र शास्त्र ही तैयार हो गया जिसे नाट्यशास्त्र कहा गया। इसके अनन्तर यह शास्त्र ही काव्यशास्त्र के क्रमिक विकास का मूल ग्रन्थ सिद्ध हुआ, इसे ‘पञ्चम वेद’ के नाम से भी अभिहित कहा जाता है। मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए आरम्भ में नृत्य का सहारा लिया जाता था, उसके बाद यह भाव-भङ्गिमाओं और संवादों से युक्त हो अभिनय के रूप में प्रचलित हुआ। नाट्य के विकास की यह यात्रा प्रायः एकाङ्की नाट्यकृतियों के रूप में आरम्भ हुई होगी। ऐसी रचनाओं का आधार कोई न कोई एक घटना रही होगी और इस घटना के आधार पर कहानी के कथ्य और तथ्य को नृत्य, वाद्य और गायन आदि के साथ उनका सुन्दर प्रसारण होता होगा। यहीं से एकाङ्की रूपकों की प्रस्तुति प्रारम्भ हुई। बाद में अनेक घटनाओं को क्रमिक रूप से एकत्रित करके जब अभिनय या नाट्यमञ्चन किया जाने लगा तो वह विस्तृत घटना नाटक का रूप लेने लगी।

Author Biographies

  • अमर दयाल

    शोधच्छात्र
    महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय
    भरतपुर, राजस्थान

  • लालाशङ्कर गयावाल

    आचार्य एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष
    रामेश्वरी देवी राजकीय कन्या महाविद्यालय
    भरतपुर,  राजस्थान

References

Books

1. गयावाल, लाला शंकर (2020). स्वातन्त्र्योत्तर संस्कृतशोधपत्रकारिता. दिल्ली: विद्यानिधि प्रकाशन, डी.10/1061, खजूरी खास, दिल्ली–110090.

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Published

2024-12-31

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Issue

Section

शोधपत्र

How to Cite

दयाल अमर, and गयावाल लालाशङ्कर. 2024. “संस्कृत-पत्रिकाओं में प्रकाशित एकाङ्की रूपकों का अवलोकन एवं उनकी सूची”. Pratnakīrti 5 (2): 1. https://ojs.sangamjournals.org/index.php/Pratnakirti/article/view/15.

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